हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस्लामी गणराज्य ईरान समेत इस मुल्क के साहिलों, जज़ीरों और सरहदों के खिलाफ अमेरिकी-इज़राईली दुश्मन की जबरदस्ती करके छेड़ी गई जंग के शुरू होने से इन खतरों का मुकाबला करने और वतने अज़ीज़ के दिफ़ा के लिए ईरान की सम्मानित जनता ने तैयारी का एलान करते हुए "जान फ़िदा बराए ईरान" नामी जनता की मुहिम शुरू की तहाँ तक 3 करोड़ से ज़्यादा ईरानियों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया है और यह तादाद अब भी तेज़ी से बढ़ रही है।
जान फ़िदा ए बराए ईरान क़ौमी मुहिम में 3 करोड़ ईरानियों ने नाम लिखवाकर इस्लामी गणराज्य ईरान में दुनिया की तारीख की सबसे बड़ी जनता की फौज तशकील दे दी है।
वाज़ेह रहे कि रहबरे इंकलाबे इस्लामी हज़रत आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई ने भी रहबरे इंकलाबे इस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई के चेहलूम के मौके़ पर अपने एक पैग़ाम में "जान फ़िदा ए बराए ईरान" मुहिम का तज़्किरा किया था।
उन्होंने फ़रमाया था अवाम का जितना मुमकिन हो सके चौकों, मुहल्लों और मस्जिदों में मौजूद होना, पहले से ज़्यादा ज़रूरी मालूम होता है। यक़ीनन अवाम की मैदान में मौजूदगी और प्रदर्शन मुज़ाकिरात के नतीजे में मो'अस्सर (प्रभावी) हैं; जिस तरह "जान फ़िदा बराए ईरान" मुहिम में लाखों लोगों की हैरतअंगेज़ और बढ़ती हुई तादाद भी इस मैदान में एक मो'अस्सर उन्सुर है।

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